Oct 27 2013

Congress ignoring development of Group Housing Societies – Satya Pal Jain

Chandigarh, October 27, 2013. Sh. Satya Pal Jain, Ex-City MP and National Chairman of the BJP’s Committee on Legal Affairs & Election Commission Issues, has accused the Congress party of ignoring the development of the areas of Group Housing Societies located in Sector 48 to 51, which has resulted in lack of even basic facilities like roads, hospital, school etc. etc. He assured the representatives of the societies that if BJP comes to power in the centre, he will ensure that the job of developing these areas is done by the government itself and not left to be done by the societies.  Satya Pal Jain with the representatives of the Group Housing Societies in Sector 51
Mr. Jain was addressing a gathering of the prominent representatives of the Group Housing Societies of Sector 48 to 51, at the residence of Sh. V.S. Chowdhary, President of Global Welfare Society in Sector 51 today.  Sh. Davesh Moudgil, the BJP area Councillor, also addressed the gathering.
Sh. Jain said that the local Congress MP, Congress councilors and its Mayors have failed to carry out any development in these areas.  The Congress government is not spending even a single penny on the development of roads, hospitals, schools etc. etc. in these areas and instead is asking the societies to pay for the same.  He said that though the government has earned huge revenue by way of transfer of ownership on the basis of GPA but not even a single penny has been given to the societies out of this for development works.
Mr. Davesh Moudgil, BJP MC, said that although the Municipal Corporation adopted a resolution moved by him on April 24, 2013 requesting the government to transfer the development of the Group Housing Societies from Sector 48 to 51 to Municipal Corporation Chandigarh, but the local Congress leaders are not allowing this resolution to be accepted by the government.
Among others, Sh. Ramesh Nikku and Smt. Anita Chowdhry, State Secretaries, Sh. Swaraj Upadhyaya, Mandal President of BJP, Smt. Meenakshi Rawla, Smt. Neeru, Sh. V.S. Negi, Sh. Sumer Singh, Sh. Sandeep Goyal, Sh. Om Parkash Babber, Sh. Hari Krishna, Sh. Nirmal Jain, Sh. Dinesh Uttam, Prof. P.K. Mittal, Sh. Sanjeev Sharma, Sh. Sanjeev Lakhanpal, Sh. S.K. Bhatnagar, Sh. Sandeep Khanna, Sh. Nanna Ram, Sh. Darshan Singh, Dr. Anil Aggarwal were also present.

Jul 08 2012

राष्ट्रपति चुनावों के कुछ रोचक तथ्य

पंजाब केसरी

राष्ट्रपति चुनावों के कुछ रोचक तथ्यभारत के संविधान की धारा 52 के अन्तर्गत देष का एक राष्ट्रपति होता है। यह पद देष का सर्वोच्च पद है, जिसका चुनाव हर 5 वर्ष के बाद होता है। अब तक देष के राष्ट्रपति के 13 चुनाव हो चुके हैं जिनका अध्यन करने पर कई रोचक तथ्य सामने आते हैैं।

देष के 13 राष्ट्रपतियों में से सबसे अधिक 10 वर्ष का कार्यकाल डा0 राजेन्द्र प्रसाद का रहा जो 1952 से 1962 तक दो बार देष के राष्ट्रपति रहे, जबकि सबसे कम कार्यकाल 2 वर्ष का डा0 ज़्ााकिर हुसैन का रहा जो 1967 से 1969 तक ही इस पद पर रह सके।

इन 13 चुनावों मंे सबसे अधिक मत श्री के. आर. नारायणन ने 1997 में 9,56,290 प्राप्त किये, श्री ऐ. पी. जे. अब्दुल कलाम ने 2002 में 9,22,884 मत तथा श्री फ़खरूदीन अली अहमद ने 1974 में 7,65,587 मत प्राप्त किये। सभी विजयी उम्मीदवारों में सबसे कम मत श्री वी. वी. गिरी ने 1969 में 4,20,677 प्राप्त करके विजय प्राप्त की।

विजयी उम्मीदवारों में सबसे अधिक जीत का अन्तर 1997 में श्री के. आर. नारायणन का रहा जिन्होंने श्री टी. एन. सेषन को 9,05,659 मतों से हराया। उससे आगे श्री ऐ. पी. जे. अब्दुल कलाम ने 2002 में श्रीमती लक्ष्मी सहगल को 8,15,518 मतों से हराया तथा 1974 में श्री फ़खरूदीन अली अहमद ने श्री त्रिदीव चौधरी को 5,75,391 मतों से हराया। जीतने का सबसे कम अन्तर 1969 में श्री वी. वी. गिरी का रहा जिन्होनें श्री नीलम संजीवा रेड्डी को मात्र 14,650 मतों से हराया। बाकी सभी चुनावों में सभी विजयी उम्मीदवारों का अन्तर 1 लाख से ज़्यादा ही रहा।

यदि प्रतिषत के हिसाब से देखा जाये तो सबसे अधिक 98.99 प्रतिषत वोट 1957 में डा0 राजेन्द्र प्रसाद को, 1962 में 98.24 प्रतिषत वोट श्री डा0 राधाकृष्णन को तथा 1997 में 94.96 प्रतिषत वोट श्री के. आर. नारायणन को मिले। सबसे कम 48.01 प्रतिषत वोट 1969 में श्री वी. वी. गिरी को मिले। बाकि सभी विजयी उम्मीदवार पहले दौर की गिनती में ही 50 प्रतिषत से अधिक वोट लेकर विजयी रहे।

आज तक के हुये सभी चुनावों में केवल श्री नीलम संजीवा रेड्डी ही 1977 में निर्विरोध चुनाव जीते जबकि बाकि सभी चुनावों में मतदान हुआ। 1977 में श्री नीलम संजीवा रेड्डी के मुकाबले के लिये भी सवार्धिक 36 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन दाखिल किये थे लेकिन चुनाव अधिकारी द्वारा इन सभी 36 के 36 उम्मीदवारों के नामांकन रद्द करने के पष्चात श्री संजीवा रेड्डी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।

राष्ट्रपति चुनावों में पांच बार सबसे कम 2-2 उम्मीदवार (2007, 2002, 1997, 1982 तथा 1974) मैदान में रहे। सबसे अधिक 17 उम्मीदवार 1967 में थे जब डा0 ज़ाकिर हुसैन जीते तथा 15 उम्मीदवार 1969 में मैदान में थे जब श्री वी. वी. गिरी चुनाव जीतेे। 1957, 1962 तथा 1987 में कुल तीन-तीन, 1992 में कुल 4 तथा 1952 में कुल 5 उम्मीदवारों में मुकाबला हुआ।

सभी विजयी उम्मीदवारों में मात्र दो उम्मीदवार 2 बार चुनाव लडे़। इनमें डा0 राजेन्द्र प्रसाद (1952 तथा 1957) में दोनों बार चुनाव जीते जबकि श्री नीलम संजीवा रेड्डी 1969 में श्री वी. वी. गिरी से हारे तथा दोबारा 1977 में निर्विरोध जीते।

केवल 1969 में श्री वी. वी. गिरी के चुनाव के समय दूसरी वरियता के मत गिनने की नौबत आई थी। पहली वरीयता में श्री गिरी 87967 मतों से श्री नीलम संजीवा रेड्डी से आगे थे परन्तु जब श्री सी. डी. देषमुख के दूसरी वरियता के मत गिने गये तो वह अन्तर कम होकर मात्र 14,650 रह गया था। श्री गिरी दूसरी वरियता के मतों की गिनती के बाद ही कोटा प्राप्त कर पाये थे। अन्य किसी भी चुनाव में प्रथम के इलावा किसी और वरीयता के मत गिनने की नौबत नहीं आई।

1967 में 9 तथा 1969 में 5 उम्मीदवार ऐसे थे जिन्हें एक भी वोट नहीं मिला। सबसे अधिक बार राष्ट्रपति का चुनाव चौ0 हरि राम नाम के सज्जन ने 5 बार लड़ा जिन्हें 1952 में 1954, 1957 में 2672, 1962 में 6341 तथा 1967 में शून्य तथा 1969 में 125 मत मिले।  1962 में तो वे डा0 राधाकृष्णन के 5,53,067 मतों के मुकाबले मात्र 6341 मत लेकर भी दूसरे स्थान पर आने में भी कामयाब रहे।

देश के सभी 13 चुने गये राष्ट्रपतियों में से 11 ने अपना कार्यकाल पूरा करके राष्ट्रपति भवन छोड़ा जबकि दो की दुर्भाग्य से 1969 में डॉ0 ज़्ााकिर हुसैन की, तथा 1977 में श्री फ़खरूद्दीन अली अहमद की, अपने कार्यकाल के दौरान ही राष्ट्रपति भवन में मृत्यु हुई। यह भी अजीब संयोग है कि जो श्री नीलम संजीवा रेड्डी, डा0 ज़्ााकिर हुसैन के निधन के कारण 1969 में हुये चुनाव में पराजित हो गये थे, वही श्री नीलम संजीवा रेड्डी, श्री फ़खरूद्दीन अली अहमद के निधन के कारण 1977 में हुये चुनाव में राष्ट्रपति का चुनाव जीतेे।

सुप्रीम कोर्ट के तीन रिटायर्ड जजों, सर्वश्री के. सुब्बाराओ ने 1967 में, श्री हंस राज खन्ना ने 1982 में तथा श्री वी. आर. कृष्णा अयर ने 1987 में राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा। परन्तु तीनों ही काफी मतों से चुनाव हारे। इसी तरह एक मात्र पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त श्री टी. ऐन. सेषन 1997 में राष्ट्रपति का चुनाव लड़े और काफ़ी अन्तर से हारे थे। परन्तु एक बात इन चारों उम्मीदवारों में समान थी कि यह चारों उम्मीदवार अपने अपने चुनाव में नम्बर दो पर रहे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य रिटायर्ड जज जस्टिस हिदायुतलला 1977 में उपराष्ट्रपति का चुनाव लडे़, जीते और पूरे 5 वर्ष तक देष के उपराष्ट्रपति रहे।

देष के अब तक चुने गये 13 राष्ट्रपतियों में से 8, सर्व श्री डा0 राजेन्द्र प्रसाद, डा0 ज़्ााकिर हुसैन, श्री वी. वी. गिरी, श्री नीलम संजीवा रेड्डी, ज्ञानी ज़्ौल सिंह, श्री आर. वेंकटरमन, श्री के. आर. नारायणन एवं डा. ऐ. पी. जे. अब्दुल कलाम के चुनाव को किसी न किसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई परन्तु सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी याचिकाओं को खारिज किया।

देष के 13 राष्ट्रपतियों में से 6 पहले उपराष्ट्रपति और फिर उसके बाद राष्ट्रपति बने। इनमें डा0 राधाकृष्णन पूरे 10 वर्ष 1952 से 1962 तक, डा0 ज़्ााकिर हुसैन 1962 से 1967 तक, श्री वी. वी. गिरी 1967 से 1969 तक, श्री आर. वेंकटरमन 1982 से 1987 तक तथा श्री शंकर दयाल शर्मा 1987 से 1992 तक तथा श्री के. आर. नारायणन 1992 से 1997 तक देष के उपराष्ट्रपति रहे। श्री भैरों सिंह शेखावत ही एक मात्र ऐसे उपराष्ट्रपति है जो राष्ट्रपति का चुनाव लड़े और हारे। अन्य किसी भी उपराष्ट्रपति, जैसे श्री कृष्ण कांत, श्री हिदायतुल्ला, श्री वी. डी. जत्ती एवं श्री गोपाल स्वरूप पाठक ने राष्ट्रपति का चुनाव नहीं लड़ा। वर्तमान उपराष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी भी इस बार का राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ रहे परन्तु भविष्य की भगवान ही जानता है।

– सत्य पाल जैन
पूर्व सांसद एवं सीनीयर ऐडवोकेट
राष्ट्रीय प्रभारी, कानूनी एवं संसदीय कार्य प्रकोष्ठ, भारतीय जनता पार्टी

Oct 25 2011

Wishing all of you a Happy & Prosperous Diwali

Season’s Greetings and Best Wishes to you and your family for a Happy and Prosperous Deepawali. 
This unique festival signifies spreading light and removing darkness, not only in our lives but also in the lives of our family members, friends and everyone around us. 
I pray to the Almighty God that Diwali may bring immense happiness and joy to you as well as your family & friends. Let us celebrate this festival in its true spirit and make every effort that we can to spread happiness and joy to people around us. 
Happy Diwali! 
Warm regards, 
Satya Pal Jain 

Oct 06 2011

Happy Dussehra to you and your family

Season’s greetings & best wishes to you & your family for a happy & prosperous Dussehra. 
This festival celebrates the victory of Truth over Falsehood, Dharma over Adharma. The way the entire nation celebrates this festival with zeal & enthusiasm is an indication of how deep & strong the roots of our cultural heritage are embedded in our society. India has always stood for truth, irrespective of the price paid for that. 
It is high time that we learn from the past, have new ideas in the present and move towards a better future for our great country. 
Heartiest congratulations on this auspicious & happy occasion. 
Warm regards, 
Satya Pal Jain 

Aug 15 2011

Happy Independence Day

Heartiest greetings to all of you on our 65th Independence Day. 
This time the Independence Day is unique because while we celebrate it today, the entire nation is anxiously watching at to what will happen tomorrow. Sh. Anna Hazare has reminded us of many things which the nation was forgetting slowly and slowly. 
Let us resolve to make India strong, prosperous and corruption free. I wish all success to the movement against corruption. 
Jai Hind. 
Satya Pal Jain

Apr 24 2011

Homage to Shri Satya Sai Baba

I express my profound grief and condolence over the passing away of Shri Satya Sai Baba, one of the greatest spiritual gurus of our times. Today, the entire world has plunged into a deep sense of sorrow by this sad news.
His Holiness has always been respected and worshiped like God by his followers. His message changed the way of life of millions of people all over the world. His following is immense, phenomenal and very rare in the modern world. He devoted his entire life in the service of humanity and established about 1200 centres in about 115 countries worldwide for this purpose.
I pay my most respectfully tribute and homage to one of the greatest souls to have set foot in this world – a noble soul who always spread the message of love, peace and co-existence. I pray to the Almighty God that His Ashirwad continues to be bestowed on all of us for all times to come, even though the void left by His ‘departure’ will remain unfulfilled forever.
Satya Pal Jain
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