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Jul 08 2012

राष्ट्रपति चुनावों के कुछ रोचक तथ्य

पंजाब केसरी

राष्ट्रपति चुनावों के कुछ रोचक तथ्यभारत के संविधान की धारा 52 के अन्तर्गत देष का एक राष्ट्रपति होता है। यह पद देष का सर्वोच्च पद है, जिसका चुनाव हर 5 वर्ष के बाद होता है। अब तक देष के राष्ट्रपति के 13 चुनाव हो चुके हैं जिनका अध्यन करने पर कई रोचक तथ्य सामने आते हैैं।

देष के 13 राष्ट्रपतियों में से सबसे अधिक 10 वर्ष का कार्यकाल डा0 राजेन्द्र प्रसाद का रहा जो 1952 से 1962 तक दो बार देष के राष्ट्रपति रहे, जबकि सबसे कम कार्यकाल 2 वर्ष का डा0 ज़्ााकिर हुसैन का रहा जो 1967 से 1969 तक ही इस पद पर रह सके।

इन 13 चुनावों मंे सबसे अधिक मत श्री के. आर. नारायणन ने 1997 में 9,56,290 प्राप्त किये, श्री ऐ. पी. जे. अब्दुल कलाम ने 2002 में 9,22,884 मत तथा श्री फ़खरूदीन अली अहमद ने 1974 में 7,65,587 मत प्राप्त किये। सभी विजयी उम्मीदवारों में सबसे कम मत श्री वी. वी. गिरी ने 1969 में 4,20,677 प्राप्त करके विजय प्राप्त की।

विजयी उम्मीदवारों में सबसे अधिक जीत का अन्तर 1997 में श्री के. आर. नारायणन का रहा जिन्होंने श्री टी. एन. सेषन को 9,05,659 मतों से हराया। उससे आगे श्री ऐ. पी. जे. अब्दुल कलाम ने 2002 में श्रीमती लक्ष्मी सहगल को 8,15,518 मतों से हराया तथा 1974 में श्री फ़खरूदीन अली अहमद ने श्री त्रिदीव चौधरी को 5,75,391 मतों से हराया। जीतने का सबसे कम अन्तर 1969 में श्री वी. वी. गिरी का रहा जिन्होनें श्री नीलम संजीवा रेड्डी को मात्र 14,650 मतों से हराया। बाकी सभी चुनावों में सभी विजयी उम्मीदवारों का अन्तर 1 लाख से ज़्यादा ही रहा।

यदि प्रतिषत के हिसाब से देखा जाये तो सबसे अधिक 98.99 प्रतिषत वोट 1957 में डा0 राजेन्द्र प्रसाद को, 1962 में 98.24 प्रतिषत वोट श्री डा0 राधाकृष्णन को तथा 1997 में 94.96 प्रतिषत वोट श्री के. आर. नारायणन को मिले। सबसे कम 48.01 प्रतिषत वोट 1969 में श्री वी. वी. गिरी को मिले। बाकि सभी विजयी उम्मीदवार पहले दौर की गिनती में ही 50 प्रतिषत से अधिक वोट लेकर विजयी रहे।

आज तक के हुये सभी चुनावों में केवल श्री नीलम संजीवा रेड्डी ही 1977 में निर्विरोध चुनाव जीते जबकि बाकि सभी चुनावों में मतदान हुआ। 1977 में श्री नीलम संजीवा रेड्डी के मुकाबले के लिये भी सवार्धिक 36 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन दाखिल किये थे लेकिन चुनाव अधिकारी द्वारा इन सभी 36 के 36 उम्मीदवारों के नामांकन रद्द करने के पष्चात श्री संजीवा रेड्डी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।

राष्ट्रपति चुनावों में पांच बार सबसे कम 2-2 उम्मीदवार (2007, 2002, 1997, 1982 तथा 1974) मैदान में रहे। सबसे अधिक 17 उम्मीदवार 1967 में थे जब डा0 ज़ाकिर हुसैन जीते तथा 15 उम्मीदवार 1969 में मैदान में थे जब श्री वी. वी. गिरी चुनाव जीतेे। 1957, 1962 तथा 1987 में कुल तीन-तीन, 1992 में कुल 4 तथा 1952 में कुल 5 उम्मीदवारों में मुकाबला हुआ।

सभी विजयी उम्मीदवारों में मात्र दो उम्मीदवार 2 बार चुनाव लडे़। इनमें डा0 राजेन्द्र प्रसाद (1952 तथा 1957) में दोनों बार चुनाव जीते जबकि श्री नीलम संजीवा रेड्डी 1969 में श्री वी. वी. गिरी से हारे तथा दोबारा 1977 में निर्विरोध जीते।

केवल 1969 में श्री वी. वी. गिरी के चुनाव के समय दूसरी वरियता के मत गिनने की नौबत आई थी। पहली वरीयता में श्री गिरी 87967 मतों से श्री नीलम संजीवा रेड्डी से आगे थे परन्तु जब श्री सी. डी. देषमुख के दूसरी वरियता के मत गिने गये तो वह अन्तर कम होकर मात्र 14,650 रह गया था। श्री गिरी दूसरी वरियता के मतों की गिनती के बाद ही कोटा प्राप्त कर पाये थे। अन्य किसी भी चुनाव में प्रथम के इलावा किसी और वरीयता के मत गिनने की नौबत नहीं आई।

1967 में 9 तथा 1969 में 5 उम्मीदवार ऐसे थे जिन्हें एक भी वोट नहीं मिला। सबसे अधिक बार राष्ट्रपति का चुनाव चौ0 हरि राम नाम के सज्जन ने 5 बार लड़ा जिन्हें 1952 में 1954, 1957 में 2672, 1962 में 6341 तथा 1967 में शून्य तथा 1969 में 125 मत मिले।  1962 में तो वे डा0 राधाकृष्णन के 5,53,067 मतों के मुकाबले मात्र 6341 मत लेकर भी दूसरे स्थान पर आने में भी कामयाब रहे।

देश के सभी 13 चुने गये राष्ट्रपतियों में से 11 ने अपना कार्यकाल पूरा करके राष्ट्रपति भवन छोड़ा जबकि दो की दुर्भाग्य से 1969 में डॉ0 ज़्ााकिर हुसैन की, तथा 1977 में श्री फ़खरूद्दीन अली अहमद की, अपने कार्यकाल के दौरान ही राष्ट्रपति भवन में मृत्यु हुई। यह भी अजीब संयोग है कि जो श्री नीलम संजीवा रेड्डी, डा0 ज़्ााकिर हुसैन के निधन के कारण 1969 में हुये चुनाव में पराजित हो गये थे, वही श्री नीलम संजीवा रेड्डी, श्री फ़खरूद्दीन अली अहमद के निधन के कारण 1977 में हुये चुनाव में राष्ट्रपति का चुनाव जीतेे।

सुप्रीम कोर्ट के तीन रिटायर्ड जजों, सर्वश्री के. सुब्बाराओ ने 1967 में, श्री हंस राज खन्ना ने 1982 में तथा श्री वी. आर. कृष्णा अयर ने 1987 में राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा। परन्तु तीनों ही काफी मतों से चुनाव हारे। इसी तरह एक मात्र पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त श्री टी. ऐन. सेषन 1997 में राष्ट्रपति का चुनाव लड़े और काफ़ी अन्तर से हारे थे। परन्तु एक बात इन चारों उम्मीदवारों में समान थी कि यह चारों उम्मीदवार अपने अपने चुनाव में नम्बर दो पर रहे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य रिटायर्ड जज जस्टिस हिदायुतलला 1977 में उपराष्ट्रपति का चुनाव लडे़, जीते और पूरे 5 वर्ष तक देष के उपराष्ट्रपति रहे।

देष के अब तक चुने गये 13 राष्ट्रपतियों में से 8, सर्व श्री डा0 राजेन्द्र प्रसाद, डा0 ज़्ााकिर हुसैन, श्री वी. वी. गिरी, श्री नीलम संजीवा रेड्डी, ज्ञानी ज़्ौल सिंह, श्री आर. वेंकटरमन, श्री के. आर. नारायणन एवं डा. ऐ. पी. जे. अब्दुल कलाम के चुनाव को किसी न किसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई परन्तु सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी याचिकाओं को खारिज किया।

देष के 13 राष्ट्रपतियों में से 6 पहले उपराष्ट्रपति और फिर उसके बाद राष्ट्रपति बने। इनमें डा0 राधाकृष्णन पूरे 10 वर्ष 1952 से 1962 तक, डा0 ज़्ााकिर हुसैन 1962 से 1967 तक, श्री वी. वी. गिरी 1967 से 1969 तक, श्री आर. वेंकटरमन 1982 से 1987 तक तथा श्री शंकर दयाल शर्मा 1987 से 1992 तक तथा श्री के. आर. नारायणन 1992 से 1997 तक देष के उपराष्ट्रपति रहे। श्री भैरों सिंह शेखावत ही एक मात्र ऐसे उपराष्ट्रपति है जो राष्ट्रपति का चुनाव लड़े और हारे। अन्य किसी भी उपराष्ट्रपति, जैसे श्री कृष्ण कांत, श्री हिदायतुल्ला, श्री वी. डी. जत्ती एवं श्री गोपाल स्वरूप पाठक ने राष्ट्रपति का चुनाव नहीं लड़ा। वर्तमान उपराष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी भी इस बार का राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ रहे परन्तु भविष्य की भगवान ही जानता है।

– सत्य पाल जैन
पूर्व सांसद एवं सीनीयर ऐडवोकेट
राष्ट्रीय प्रभारी, कानूनी एवं संसदीय कार्य प्रकोष्ठ, भारतीय जनता पार्टी